लखनऊ: 69000 शिक्षक भर्ती के आरक्षित वर्ग के 6800 अभ्यर्थी एक बार फिर आंदोलन की तैयारी में हैं। अभ्यर्थियों ने 29 अगस्त से लखनऊ में धरना-प्रदर्शन शुरू करने का ऐलान किया है। उनका कहना है कि वे लंबे समय से नियुक्ति और न्याय की मांग को लेकर संघर्ष कर रहे हैं, लेकिन अब तक मामले का स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। मामला फिलहाल सुप्रीम कोर्ट में लंबित है।
5 जनवरी 2022 की सूची में शामिल अभ्यर्थियों की नियुक्ति की मांग
अभ्यर्थियों के अनुसार, 69000 शिक्षक भर्ती में आरक्षण नियमों के क्रियान्वयन को लेकर कथित विसंगतियों के कारण बड़ी संख्या में पात्र अभ्यर्थी चयन और नियुक्ति से वंचित रह गए। लगातार विरोध और आपत्तियों के बाद बेसिक शिक्षा विभाग ने 5 जनवरी 2022 को 6800 अभ्यर्थियों की सूची जारी की थी। हालांकि, सूची जारी होने के बावजूद इसमें शामिल अभ्यर्थियों को अब तक नियुक्ति नहीं मिल सकी है।
मुख्यमंत्री से तत्काल मुलाकात चाहते हैं अभ्यर्थी
आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों का कहना है कि उनका आंदोलन किसी दूसरे अभ्यर्थी का अधिकार छीनने के लिए नहीं है। वे संवैधानिक अधिकार, निष्पक्ष चयन प्रक्रिया और नियुक्ति की मांग कर रहे हैं। उनकी प्रमुख मांग 5 जनवरी 2022 को जारी 6800 अभ्यर्थियों की सूची में शामिल पात्र अभ्यर्थियों को नियुक्ति देने की है। इसके साथ ही वे मुख्यमंत्री से अपने प्रतिनिधिमंडल की मुलाकात की मांग कर रहे हैं, ताकि सरकार के सामने नियुक्ति से जुड़े पूरे मामले और अपनी समस्याएं रख सकें।
‘6800 अभ्यर्थियों को न्याय दो, नियुक्ति दो’
अभ्यर्थियों ने कहा है कि वे शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से आंदोलन करेंगे। उनका कहना है कि वर्षों से नियुक्ति की प्रतीक्षा कर रहे अभ्यर्थियों का भविष्य अधर में है। उनका संदेश है कि 6800 अभ्यर्थियों को न्याय और नियुक्ति दी जाए तथा मुख्यमंत्री प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात कर समस्या के समाधान का रास्ता निकालें।
सुप्रीम कोर्ट में लंबित है मामला
अभ्यर्थियों के मुताबिक, मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट में जस्टिस दीपांकर दत्ता और जस्टिस जॉर्ज मेसी की पीठ में हो रही थी। उन्हें उम्मीद थी कि जल्द फैसला आ सकता है, लेकिन सुनवाई कर रही पीठ में बदलाव के बाद अंतिम निर्णय में और समय लगने की संभावना है। इसी के चलते अभ्यर्थियों ने दोबारा लखनऊ में आंदोलन शुरू करने का फैसला किया है।
पहले 640 दिनों तक चला था धरना
आरक्षित वर्ग के अभ्यर्थियों ने इससे पहले सहायक शिक्षक भर्ती में आरक्षण नियमों को सही तरीके से लागू नहीं किए जाने के आरोप में 16 जून 2022 से लगातार 640 दिनों तक धरना दिया था। इस दौरान कई मंत्रियों के आवास का घेराव भी किया गया। बाद में यह मामला हाईकोर्ट से होते हुए सुप्रीम कोर्ट पहुंचा।
सरकार से समाधान निकालने की अपील
अभ्यर्थियों ने कहा है कि प्रस्तावित आंदोलन पूरी तरह शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक रहेगा। उन्होंने सरकार से मामले को संवेदनशीलता के साथ देखने और वर्षों से नियुक्ति का इंतजार कर रहे 6800 अभ्यर्थियों के भविष्य को सुरक्षित करने की अपील की है।
